श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 57: भीमसेन और दुर्योधनका गदायुद्ध  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  9.57.42-43h 
तां नामृष्यत कौरव्यो गदां प्रतिहतां रणे॥ ४२॥
मत्तो द्विप इव क्रुद्ध: प्रतिकुञ्जरदर्शनात्।
 
 
अनुवाद
जैसे क्रोधित हाथी अपने प्रतिद्वन्द्वी हाथी को देखकर भी सहन नहीं कर सकता, वैसे ही कुरुवंशी दुर्योधन भी युद्धभूमि में अपनी गदा का प्रहार देखकर भी सहन नहीं कर सका ॥42 1/2॥
 
Just as an enraged elephant cannot bear the sight of its rival elephant, similarly the Kuru descendant Duryodhana could not bear the sight of his mace being struck on the battlefield. ॥ 42 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)