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mahabharat 9.57.12-13: राजन! उस समय जब भीमसेन युद्धभूमि में गदा चलाने लगे, तब दर्शकों ने देखा कि उनकी भारी गदा यम के दण्ड के समान भयंकर थी। वह इन्द्र के वज्र के समान उठी हुई थी और शत्रुओं को टुकड़े-टुकड़े कर देने में समर्थ थी। गदा चलाते समय उसकी भयंकर और भयंकर ध्वनि वहाँ दो घण्टों तक गूँजती रही। 12-13.   |   mahabharat अध्याय 9.57: भीमसेन और दुर्योधनका गदायुद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 57: भीमसेन और दुर्योधनका गदायुद्ध  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  9.57.12-13 
यमदण्डोपमां गुर्वीमिन्द्राशनिमिवोद्यताम्।
ददृशु: प्रेक्षका राजन् रौद्रीं विशसनीं गदाम्॥ १२॥
आविद्धॺतो गदां तस्य भीमसेनस्य संयुगे।
शब्द: सुतुमुलो घोरो मुहूर्तं समपद्यत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय जब भीमसेन युद्धभूमि में गदा चलाने लगे, तब दर्शकों ने देखा कि उनकी भारी गदा यम के दण्ड के समान भयंकर थी। वह इन्द्र के वज्र के समान उठी हुई थी और शत्रुओं को टुकड़े-टुकड़े कर देने में समर्थ थी। गदा चलाते समय उसकी भयंकर और भयंकर ध्वनि वहाँ दो घण्टों तक गूँजती रही। 12-13.
 
King! At that time, when Bhimasena started swinging his mace on the battlefield, the spectators saw that his heavy mace was as dreadful as Yama's Danda. It was raised up like Indra's thunderbolt and was capable of breaking the enemy into pieces. While swinging the mace, its loud and terrifying sound kept echoing there for two hours. 12-13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)