Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.56.8-10: बिजली की गड़गड़ाहट के साथ प्रचण्ड वायु चलने लगी, सर्वत्र धूल उड़ने लगी, समस्त दिशाएँ अंधकार से ढक गईं, सैकड़ों भयानक उल्काएँ आकाश से बड़े जोर से गर्जना करती हुई पृथ्वी को छेदती हुई गिरने लगीं। हे प्रजानाथ! राहु ने अमावस्या के बिना ही सूर्य को निगल लिया, वन और वृक्षों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी जोर-जोर से काँपने लगी। 8-10। | mahabharat अध्याय 9.56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बिजली की गड़गड़ाहट के साथ प्रचण्ड वायु चलने लगी, सर्वत्र धूल उड़ने लगी, समस्त दिशाएँ अंधकार से ढक गईं, सैकड़ों भयानक उल्काएँ आकाश से बड़े जोर से गर्जना करती हुई पृथ्वी को छेदती हुई गिरने लगीं। हे प्रजानाथ! राहु ने अमावस्या के बिना ही सूर्य को निगल लिया, वन और वृक्षों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी जोर-जोर से काँपने लगी। 8-10।
With the thunder of lightning, a strong wind started blowing, dust started falling everywhere, all directions were covered with darkness, hundreds of terrifying meteors started falling from the sky with a loud noise and thunder like thunder, piercing the earth. O Prajanath! Rahu swallowed the Sun without the new moon, the entire earth including forests and trees started shaking violently. 8-10.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥