श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  9.56.46 
बृंहन्ति कुञ्जरास्तत्र हया ह्रेषन्ति चासकृत्।
शस्त्राणि चाप्यदीप्यन्त पाण्डवानां जयैषिणाम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
उस समय हाथी बार-बार चिंघाड़ने लगे और घोड़े हिनहिनाने लगे। उसी समय विजयी पाण्डवों के अस्त्र-शस्त्र चमकने लगे। 46।
 
At that time the elephants started trumpeting repeatedly and the horses started neighing. At the same time, the weapons of the victorious Pandavas started shining. 46.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि गदायुद्धारम्भे षट्पञ्चाशत्तमोध्याय:॥ ५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें गदायुद्धका आरम्भविषयक छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५६॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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