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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  9.56.44 
उन्मत्तमिव मातङ्गं तलशब्दैर्नराधिपा:।
भूय: संहर्षयांचक्रुर्दुर्योधनममर्षणम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जैसे लोग ताली बजाकर मतवाले हाथी को क्रोधित कर देते हैं, उसी प्रकार राजाओं ने भी ताली बजाकर क्रोधित दुर्योधन को पुनः हर्ष और उत्साह से भर दिया।
 
Thereafter, just as people enrage a drunken elephant by clapping, similarly, the kings, by clapping, again filled the angry Duryodhana with joy and enthusiasm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)