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श्लोक 9.56.42  |
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा सर्व एवाभ्यपूजयन्।
राजान: सोमकाश्चैव ये तत्रासन् समागता:॥ ४२॥ |
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| अनुवाद |
| दुर्योधन के ये वचन सुनकर वहाँ आये हुए समस्त राजाओं और सोमकों ने उसकी बहुत प्रशंसा की ॥42॥ |
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| On hearing these words of Duryodhana, all the kings and Somakas who had come there praised him greatly. ॥ 42॥ |
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