श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.56.41 
किं वाचा बहुनोक्तेन कत्थितेन च दुर्मते।
वाणी सम्पद्यतामेषा कर्मणा मा चिरं कृथा:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे मूर्ख! बहुत डींगें मारने से क्या लाभ? जो कुछ तू कहता है, उसे शीघ्र ही करके दिखा।॥41॥
 
‘You fool! What is the use of boasting too much? Whatever you say, put it into action soon.'॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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