श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.56.4 
भूत्वा हि जगतो नाथो ह्यनाथ इव मे सुत:।
गदामुद्यम्य यो याति किमन्यद् भागधेयत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मेरा पुत्र, जो सम्पूर्ण जगत का स्वामी था, हाथ में गदा लेकर अनाथ की भाँति रणभूमि की ओर पैदल ही चला जा रहा था। इसे भाग्य के अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता है?॥4॥
 
My son, who was the lord of the whole world, was walking on foot to the battlefield like an orphan with a mace in his hand. What else can this be called except fate?॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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