श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  9.56.38 
किं कत्थनेन बहुना युध्यस्व त्वं वृकोदर।
अद्य तेऽहं विनेष्यामि युद्धश्रद्धां कुलाधम॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वृकोदर! घमंड करने से क्या लाभ? तुम्हें मुझसे युद्ध करना चाहिए। कुलाधाम! आज मैं तुम्हारे युद्ध करने के साहस को नष्ट कर दूँगा॥ 38॥
 
Vrikodara! What is the use of boasting? You should fight with me. Kuladham! Today I will destroy your courage to fight.॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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