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mahabharat 9.56.30-32: तूने सभा में रजस्वला द्रौपदी का अपमान किया और उसे कष्ट पहुँचाया, तूने सुबलपुत्र के साथ जुए में राजा युधिष्ठिर को धोखा दिया, तेरे कारण हम सबने वन में बहुत दुःख उठाया और विराटनगर में पर-योनि में गए हुए प्राणियों के समान जीवन व्यतीत करना पड़ा; इन सब कष्टों के कारण मेरे हृदय में जो क्रोध एकत्रित हुआ है, वह सब आज मैं निकाल दूँगा। हे दुष्ट! सौभाग्य से आज मैंने तेरे दर्शन कर लिए हैं॥30-32॥   |   mahabharat अध्याय 9.56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.56.30-32 
द्रौपदी च परिक्लिष्टा सभामध्ये रजस्वला॥ ३०॥
द्यूतेन वञ्चितो राजा यत् त्वया सौबलेन च।
वने दु:खं च यत् प्राप्तमस्माभिस्त्वत्कृतं महत्॥ ३१॥
विराटनगरे चैव योन्यन्तरगतैरिव।
तत् सर्वं पातयाम्यद्य दिष्ट्या दृष्टोऽसि दुर्मते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तूने सभा में रजस्वला द्रौपदी का अपमान किया और उसे कष्ट पहुँचाया, तूने सुबलपुत्र के साथ जुए में राजा युधिष्ठिर को धोखा दिया, तेरे कारण हम सबने वन में बहुत दुःख उठाया और विराटनगर में पर-योनि में गए हुए प्राणियों के समान जीवन व्यतीत करना पड़ा; इन सब कष्टों के कारण मेरे हृदय में जो क्रोध एकत्रित हुआ है, वह सब आज मैं निकाल दूँगा। हे दुष्ट! सौभाग्य से आज मैंने तेरे दर्शन कर लिए हैं॥30-32॥
 
You insulted and caused pain to Draupadi who was menstruating in the court, you cheated King Yudhishthira in gambling with the son of Subala, we all suffered a lot in the forest because of you and we had to live like creatures who have gone to another species in Viratnagar; today I will pour out all the anger that has accumulated in my heart because of all these sufferings. O evil one! Fortunately, I have seen you today.॥ 30-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)