श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  9.56.29-30h 
राज्ञश्च धृतराष्ट्रस्य तथा त्वमपि चात्मन:॥ २९॥
स्मर तद् दुष्कृतं कर्म यद् वृत्तं वारणावते।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन! वारणावत नगरी में राजा धृतराष्ट्र और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मों का स्मरण करो।'
 
‘Duryodhana! Remember the misdeeds of King Dhritarashtra and yourself that happened in the city of Varanavat. 29 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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