श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  9.56.28-29h 
तमुद्यतगदं दृष्ट्वा कैलासमिव शृङ्गिणम्॥ २८॥
भीमसेन: पुन: क्रुद्धो दुर्योधनमुवाच ह।
 
 
अनुवाद
कैलाश पर्वत के समान गदा उठाए हुए दुर्योधन को खड़ा देखकर भीमसेन पुनः क्रोधित हो गए और उससे इस प्रकार बोले -॥28 1/2॥
 
Seeing Duryodhana standing with a mace raised like the peaked Kailash mountain, Bhimasena again became enraged and spoke to him thus -॥ 28 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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