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mahabharat 9.56.24-25h: राजेन्द्र! महाराज! आज मूर्ख कुरुराज दुर्योधन का सारा सुख नष्ट हो गया। अब उसके लिए अपनी पत्नियों को देखना और उनसे पुनः मिलना असम्भव है।'   |   mahabharat अध्याय 9.56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  9.56.24-25h 
अद्य सौख्यं तु राजेन्द्र कुरुराजस्य दुर्मते:॥ २४॥
समाप्तं च महाराज नारीणां दर्शनं पुन:।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! महाराज! आज मूर्ख कुरुराज दुर्योधन का सारा सुख नष्ट हो गया। अब उसके लिए अपनी पत्नियों को देखना और उनसे पुनः मिलना असम्भव है।'
 
‘Rajendra! Maharaj! Today all the happiness of the foolish Kuru King Duryodhan has ended. Now it is impossible for him to see his wives and meet them again. 24 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)