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mahabharat 9.56.23-24h: आज एक ही दिन में मैं उसे मारकर अपना ऋण चुका दूँगा। हे भारतभूषण! आज दुष्ट बुद्धि और अपराजित आत्मा वाले धृतराष्ट्रपुत्र का जीवन समाप्त हो गया। अब उसे अपने माता-पिता के दर्शन भी न मिलेंगे।॥23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  9.56.23-24h 
एकाह्ना विनिहत्येमं भविष्याम्यात्मनोऽनृण:।
अद्यायुर्धार्तराष्ट्रस्य दुर्मतेरकृतात्मन:॥ २३॥
समाप्तं भरतश्रेष्ठ मातापित्रोश्च दर्शनम्।
 
 
अनुवाद
आज एक ही दिन में मैं उसे मारकर अपना ऋण चुका दूँगा। हे भारतभूषण! आज दुष्ट बुद्धि और अपराजित आत्मा वाले धृतराष्ट्रपुत्र का जीवन समाप्त हो गया। अब उसे अपने माता-पिता के दर्शन भी न मिलेंगे।॥23 1/2॥
 
‘Today, in one day, I will kill him and repay my debt to myself. O Bharat Bhushan! Today, the life of the son of Dhritarashtra, who has a bad mind and an undefeated soul, has ended. Now he will not even get a chance to see his parents.॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)