Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.56.20-22: वह हस्तिनापुर में फिर कभी प्रवेश नहीं करेगा। हे भरतश्रेष्ठ! उसने मेरी शय्या पर सर्प बिठाया था, मेरे भोजन में विष मिलाया था, मुझे प्रमाणकोट के जल में डाला था, लाक्षागृह में जलाने का प्रयत्न किया था, सभा में मेरा उपहास किया था, मेरा सब कुछ छीन लिया था और मुझे बारह वर्ष तक वन में तथा एक वर्ष तक अज्ञातवास में रहने को विवश किया था; मैं उसके द्वारा दिए गए समस्त दुःखों का अन्त करूँगा॥ 20-22॥ | mahabharat अध्याय 9.56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह हस्तिनापुर में फिर कभी प्रवेश नहीं करेगा। हे भरतश्रेष्ठ! उसने मेरी शय्या पर सर्प बिठाया था, मेरे भोजन में विष मिलाया था, मुझे प्रमाणकोट के जल में डाला था, लाक्षागृह में जलाने का प्रयत्न किया था, सभा में मेरा उपहास किया था, मेरा सब कुछ छीन लिया था और मुझे बारह वर्ष तक वन में तथा एक वर्ष तक अज्ञातवास में रहने को विवश किया था; मैं उसके द्वारा दिए गए समस्त दुःखों का अन्त करूँगा॥ 20-22॥
‘He will never again enter Hastinapur. O best of the Bharatas! He had set a snake on my bed, had poisoned my food, had thrown me in the water of Pramankot, had tried to burn me in the Lakhshagriha, had ridiculed me in the assembly, had taken away everything and had forced me to live in the forest for twelve years and incognito for one year; I shall put an end to all the miseries inflicted by him.॥ 20-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥