Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.56.16-17: भ्राता! यह मन्दबुद्धि दुर्योधन मुझे रणभूमि में किसी भी प्रकार पराजित नहीं कर सकता। आज मैं अपने हृदय में दीर्घकाल से छिपे हुए क्रोध को कौरवराज दुर्योधन पर उसी प्रकार छोड़ूँगा, जैसे अर्जुन ने खाण्डव वन में अग्नि छोड़ी थी। पाण्डुपुत्र! आज मैं तुम्हारे हृदय से काँटा निकाल दूँगा॥ 16-17॥   |   mahabharat अध्याय 9.56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  9.56.16-17 
नैष शक्तो रणे जेतुं मन्दात्मा मां सुयोधन:।
अद्य क्रोधं विमोक्ष्यामि निगूढं हृदये चिरम्॥ १६॥
सुयोधने कौरवेन्द्रे खाण्डवेऽग्निमिवार्जुन:।
शल्यमद्योद्धरिष्यामि तव पाण्डव हृच्छयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भ्राता! यह मन्दबुद्धि दुर्योधन मुझे रणभूमि में किसी भी प्रकार पराजित नहीं कर सकता। आज मैं अपने हृदय में दीर्घकाल से छिपे हुए क्रोध को कौरवराज दुर्योधन पर उसी प्रकार छोड़ूँगा, जैसे अर्जुन ने खाण्डव वन में अग्नि छोड़ी थी। पाण्डुपुत्र! आज मैं तुम्हारे हृदय से काँटा निकाल दूँगा॥ 16-17॥
 
Brother! This dull-witted Duryodhan cannot defeat me in the battlefield in any way. Today I will release the anger hidden in my heart for a long time on the Kaurava king Duryodhan in the same way as Arjun released fire in the Khandav forest. Son of Pandu! Today I will remove the thorn from your heart.॥ 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)