श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.56.14 
उदपानगताश्चापो व्यवर्धन्त समन्तत:।
अशरीरा महानादा: श्रूयन्ते स्म तदा नृप॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! कुओं का जल सब ओर से अपने आप ही ऊपर आने लगा और बिना किसी स्थूल शरीर के भी जोर-जोर से गर्जना होने लगी॥14॥
 
O Lord of men! The water in the wells began to rise on its own from all sides and loud roars could be heard without any physical body.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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