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श्लोक 9.56.14  |
उदपानगताश्चापो व्यवर्धन्त समन्तत:।
अशरीरा महानादा: श्रूयन्ते स्म तदा नृप॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| हे मनुष्यों के स्वामी! कुओं का जल सब ओर से अपने आप ही ऊपर आने लगा और बिना किसी स्थूल शरीर के भी जोर-जोर से गर्जना होने लगी॥14॥ |
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| O Lord of men! The water in the wells began to rise on its own from all sides and loud roars could be heard without any physical body.॥ 14॥ |
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