Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.56.12: नाना प्रकार के आकार वाले मृग सब दिशाओं में दौड़ने लगे। वे सियारियाँ, जो अत्यन्त भयानक और विकराल रूप धारण किए हुए थीं और जिनके मुख अग्नि से प्रज्वलित हो रहे थे, अशुभ वचन बोल रही थीं॥12॥   |   mahabharat अध्याय 9.56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.56.12 
मृगा बहुविधाकारा: सम्पतन्ति दिशो दश।
दीप्ता: शिवाश्चाप्यनदन् घोररूपा: सुदारुणा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के आकार वाले मृग सब दिशाओं में दौड़ने लगे। वे सियारियाँ, जो अत्यन्त भयानक और विकराल रूप धारण किए हुए थीं और जिनके मुख अग्नि से प्रज्वलित हो रहे थे, अशुभ वचन बोल रही थीं॥12॥
 
Deer of various shapes started running in all directions. The female jackals, who had assumed a very terrifying and dreadful form and whose faces were blazing with fire, were uttering ominous words.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)