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mahabharat 9.56.1: वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! तत्पश्चात भीमसेन और दुर्योधन में घोर वाकयुद्ध होने लगा। यह घटना सुनकर राजा धृतराष्ट्र अत्यन्त दुःखी हुए और संजय से इस प्रकार बोले-॥1॥   |   mahabharat अध्याय 9.56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 56: दुर्योधनके लिये अपशकुन, भीमसेनका उत्साह तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्धके पश्चात् गदायुद्धका आरम्भ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.56.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो वाग्युद्धमभवत् तुमुलं जनमेजय।
यत्र दु:खान्वितो राजा धृतराष्ट्रोऽब्रवीदिदम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! तत्पश्चात भीमसेन और दुर्योधन में घोर वाकयुद्ध होने लगा। यह घटना सुनकर राजा धृतराष्ट्र अत्यन्त दुःखी हुए और संजय से इस प्रकार बोले-॥1॥
 
Vaishampayana says- Janamejaya! Thereafter a fierce war of words started between Bhimasena and Duryodhan. Hearing this incident, King Dhritarashtra became very sad and spoke to Sanjaya in this manner-॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)