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mahabharat 9.55.9-10: अतः नरेश्वर! हम सब लोग शीघ्र ही यहाँ से समन्तपंचक तीर्थ को चलें। वह भूमि देवलोक में प्रजापति की उत्तरवेदी के नाम से विख्यात है। जो मनुष्य तीनों लोकों में उस परम पवित्र सनातन तीर्थ में युद्ध करते हुए मरता है, वह अवश्य ही स्वर्ग को प्राप्त होता है। 9-10॥   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  9.55.9-10 
तस्मात् समन्तपञ्चकमितो याम द्रुतं नृप।
प्रथितोत्तरवेदी सा देवलोके प्रजापते:॥ ९॥
तस्मिन् महापुण्यतमे त्रैलोक्यस्य सनातने।
संग्रामे निधनं प्राप्य ध्रुवं स्वर्गे भविष्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अतः नरेश्वर! हम सब लोग शीघ्र ही यहाँ से समन्तपंचक तीर्थ को चलें। वह भूमि देवलोक में प्रजापति की उत्तरवेदी के नाम से विख्यात है। जो मनुष्य तीनों लोकों में उस परम पवित्र सनातन तीर्थ में युद्ध करते हुए मरता है, वह अवश्य ही स्वर्ग को प्राप्त होता है। 9-10॥
 
So Nareshwar! Let us all go to Samantapanchak pilgrimage from here soon. That land is famous in the Devlok by the name of Prajapati's Uttarvedi. A person who dies fighting in that most sacred Sanatan Tirtha of the three worlds will definitely go to heaven. 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)