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कुरुकुल के दोनों श्रेष्ठ योद्धा एक दूसरे को कटु वचन कहते हुए युद्ध के लिए तैयार खड़े हो गए, मानो रणभूमि में वृत्रासुर और इन्द्र एक दूसरे की ओर देख रहे हों ॥51॥
Using bitter words at each other, both the best warriors of Kurukula stood ready for the battle, looking at each other like Vritrasur and Indra in the battlefield. 51॥
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि युद्धारम्भे पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें युद्धका आरम्भविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥