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mahabharat 9.55.5-6h: तब बलरामजी ने युधिष्ठिर से मधुर वाणी में धर्म से परिपूर्ण ऐसे वचन कहे जो वीर योद्धाओं के लिए हितकर हैं ॥5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  9.55.5-6h 
ततो युधिष्ठिरं रामो वाक्यमेतदुवाच ह॥ ५॥
मधुरं धर्मसंयुक्तं शूराणां हितमेव च।
 
 
अनुवाद
तब बलरामजी ने युधिष्ठिर से मधुर वाणी में धर्म से परिपूर्ण ऐसे वचन कहे जो वीर योद्धाओं के लिए हितकर हैं ॥5 1/2॥
 
Then Balarama spoke to Yudhishthira in a sweet voice, words full of righteousness that are beneficial for brave warriors. ॥ 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)