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mahabharat 9.55.43-45h: तत्पश्चात् दुर्योधन ने महाबली बलराम, महाबली कृष्ण, महाबुद्धिमान पांचाल, संजय, केकय और अपने भाइयों के साथ खड़े हुए अभिमानी युधिष्ठिर से ये गर्वपूर्ण वचन कहे -॥ 43-44 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 43-45h
 
 
श्लोक  9.55.43-45h 
ततो दुर्योधनो राजन्निदमाह युधिष्ठिरम्॥ ४३॥
भ्रातृभि: सहितं चैव कृष्णेन च महात्मना।
रामेणामितवीर्येण वाक्यं शौटीर्यसम्मतम्॥ ४४॥
केकयै: सृञ्जयैर्दृप्तं पञ्चालैश्च महात्मभि:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दुर्योधन ने महाबली बलराम, महाबली कृष्ण, महाबुद्धिमान पांचाल, संजय, केकय और अपने भाइयों के साथ खड़े हुए अभिमानी युधिष्ठिर से ये गर्वपूर्ण वचन कहे -॥ 43-44 1/2॥
 
King! Thereafter Duryodhana spoke these proud words to the proud Yudhishthira who was standing with the mighty Balarama, the great Krishna, the great-minded Panchala, Sanjaya, the Kekayas and his brothers -॥ 43-44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)