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mahabharat 9.55.40-41h: उनके होंठ क्रोध से काँप रहे थे। दोनों श्रेष्ठ पुरुष एक-दूसरे को घूर रहे थे, हाथों में गदाएँ लिए हुए एक-दूसरे से लड़ने को तैयार थे।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  9.55.40-41h 
रोषात् प्रस्फुरमाणोष्ठौ निरीक्षन्तौ परस्परम्॥ ४०॥
तौ समेतौ महात्मानौ गदाहस्तौ नरोत्तमौ।
 
 
अनुवाद
उनके होंठ क्रोध से काँप रहे थे। दोनों श्रेष्ठ पुरुष एक-दूसरे को घूर रहे थे, हाथों में गदाएँ लिए हुए एक-दूसरे से लड़ने को तैयार थे।
 
Their lips were quivering with anger. Both these best of men were glaring at each other, maces in their hands and were ready to fight each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)