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mahabharat 9.55.39-40h: वे दोनों महाबुद्धिमान योद्धा दो क्रुद्ध हाथियों, दो धधकती हुई अग्नियों तथा दो शिखरों वाले पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  9.55.39-40h 
गजाविव सुसंरब्धौ ज्वलिताविव पावकौ॥ ३९॥
ददृशाते महात्मानौ सशृङ्गाविव पर्वतौ।
 
 
अनुवाद
वे दोनों महाबुद्धिमान योद्धा दो क्रुद्ध हाथियों, दो धधकती हुई अग्नियों तथा दो शिखरों वाले पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Those two great-minded warriors looked like two enraged elephants, two blazing fires and two mountains with their peaks. 39 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)