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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  9.55.26-27h 
तावुद्यतगदापाणी दुर्योधनवृकोदरौ॥ २६॥
संयुगे च प्रकाशेतां गिरी सशिखराविव।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन और भीमसेन दोनों की गदाएँ ऊपर की ओर उठी हुई थीं। उस समय वे दोनों युद्धभूमि में शिखरों सहित दो पर्वतों के समान चमक रही थीं।
 
The maces of both Duryodhan and Bhimasena were raised upwards. At that time, both of them were shining like two mountains with their peaks on the battlefield. 26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)