Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.55.23-25h: हे मनुष्यों के स्वामी! तत्पश्चात् बलवान कुरुराज दुर्योधन ने प्रसन्न मन से हाथ में गदा ली, क्रोध से लाल आँखें किये, गलफड़े चाटे और गहरी साँस लेते हुए भीमसेन की ओर देखा और उन्हें इस प्रकार ललकारा, मानो एक हाथी दूसरे हाथी को ललकार रहा हो। | mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मनुष्यों के स्वामी! तत्पश्चात् बलवान कुरुराज दुर्योधन ने प्रसन्न मन से हाथ में गदा ली, क्रोध से लाल आँखें किये, गलफड़े चाटे और गहरी साँस लेते हुए भीमसेन की ओर देखा और उन्हें इस प्रकार ललकारा, मानो एक हाथी दूसरे हाथी को ललकार रहा हो।
Lord of men! Thereafter the powerful Kuru King Duryodhana, with a happy heart, took his mace in his hand, his eyes turning red with anger, licking his gills and taking deep breaths, looked at Bhimasena and started challenging him as if one elephant was calling another elephant.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥