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mahabharat 9.55.21-22h: महाराज! युद्धभूमि के मध्य में खड़े हुए ये दोनों श्रेष्ठ भाई उगते हुए चन्द्रमा और सूर्य के समान शोभायमान थे। 21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  9.55.21-22h 
रणमण्डलमध्यस्थौ भ्रातरौ तौ नरर्षभौ॥ २१॥
अशोभेतां महाराज चन्द्रसूर्याविवोदितौ।
 
 
अनुवाद
महाराज! युद्धभूमि के मध्य में खड़े हुए ये दोनों श्रेष्ठ भाई उगते हुए चन्द्रमा और सूर्य के समान शोभायमान थे। 21 1/2॥
 
Maharaj! Standing in the middle of the battlefield, these two best brothers were as beautiful as the rising moon and the sun. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)