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mahabharat 9.55.20-21h: भीमसेन और दुर्योधन दोनों वीर कवच धारण करके युद्धभूमि में क्रुद्ध हुए दो हाथियों के समान शोभायमान हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  9.55.20-21h 
वर्मभ्यां संयतौ वीरौ भीमदुर्योधनावुभौ॥ २०॥
संयुगे च प्रकाशेते संरब्धाविव कुञ्जरौ।
 
 
अनुवाद
भीमसेन और दुर्योधन दोनों वीर कवच धारण करके युद्धभूमि में क्रुद्ध हुए दो हाथियों के समान शोभायमान हो रहे थे।
 
The two heroes, Bhimasena and Duryodhana, wearing armour, gleamed like two enraged elephants on the battlefield. 20 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)