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mahabharat 9.55.16-18h: तत्पश्चात् वे सभी महारथी आपके पुत्र को लेकर पश्चिम दिशा की ओर चले और पूर्वोक्त कुरुक्षेत्र में पहुँचे। वह महान तीर्थस्थान सरस्वती के दक्षिण तट पर स्थित था और मोक्ष प्रदान करने वाला था। वहाँ कहीं भी बंजर भूमि नहीं थी। सभी लोग उसी स्थान पर आकर युद्ध करना पसंद करते थे। 16-17 1/2"   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 16-18h
 
 
श्लोक  9.55.16-18h 
ततस्ते तु कुरुक्षेत्रं प्राप्ता नरवरोत्तमा:॥ १६॥
प्रतीच्यभिमुखं देशं यथोद्दिष्टं सुतेन ते।
दक्षिणेन सरस्वत्या: स्वयनं तीर्थमुत्तमम्॥ १७॥
तस्मिन् देशे त्वनिरिणे ते तु युद्धमरोचयन्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे सभी महारथी आपके पुत्र को लेकर पश्चिम दिशा की ओर चले और पूर्वोक्त कुरुक्षेत्र में पहुँचे। वह महान तीर्थस्थान सरस्वती के दक्षिण तट पर स्थित था और मोक्ष प्रदान करने वाला था। वहाँ कहीं भी बंजर भूमि नहीं थी। सभी लोग उसी स्थान पर आकर युद्ध करना पसंद करते थे। 16-17 1/2"
 
After that, all those great warriors moved towards the west with your son and reached the aforesaid Kurukshetra. That great place of pilgrimage was situated on the south bank of Saraswati and was the one who attains salvation. There was no barren land anywhere. Everyone liked to come to the same place and fight the war. 16-17 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)