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mahabharat 9.55.14-15h: वटिका और चारण भी उसे देखकर बहुत प्रसन्न हुए। पाण्डवों से घिरा हुआ आपका पुत्र, कौरवराज दुर्योधन उन्मत्त हाथी के समान विचरण कर रहा था।   |   mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  9.55.14-15h 
वातिकाश्चारणा ये तु दृष्ट्वा ते हर्षमागता:।
स पाण्डवै: परिवृत: कुरुराजस्तवात्मज:॥ १४॥
मत्तस्येव गजेन्द्रस्य गतिमास्थाय सोऽव्रजत्।
 
 
अनुवाद
वटिका और चारण भी उसे देखकर बहुत प्रसन्न हुए। पाण्डवों से घिरा हुआ आपका पुत्र, कौरवराज दुर्योधन उन्मत्त हाथी के समान विचरण कर रहा था।
 
Vaatika and Charan also became very happy on seeing him. Surrounded by the Pandavas, your son, King of Kurus, Duryodhana was walking like a mad elephant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)