Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.55.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार वह भयंकर युद्ध हुआ, जिसके विषय में अत्यन्त दुःखी राजा धृतराष्ट्र ने इस प्रकार प्रश्न पूछा था॥1॥ | mahabharat अध्याय 9.55: बलरामजीकी सलाहसे सबका कुरुक्षेत्रके समन्तपंचक तीर्थमें जाना और वहाँ भीम तथा दुर्योधनमें गदायुद्धकी तैयारी । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवं तदभवद् युद्धं तुमुलं जनमेजय।
यत्र दु:खान्वितो राजा धृतराष्ट्रोऽब्रवीदिदम्॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार वह भयंकर युद्ध हुआ, जिसके विषय में अत्यन्त दुःखी राजा धृतराष्ट्र ने इस प्रकार प्रश्न पूछा था॥1॥
Vaishmpayana says: Janamejaya! Thus did that fierce battle take place, regarding which the very sad king Dhritarashtra asked the question in this manner.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥