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mahabharat 9.54.7: राजन! वह तेजस्वी और तपस्वी भिक्षुणी, जो कठोर व्रत और ब्रह्मचर्य का पालन करती थी, महात्मा शाण्डिल्य की पुत्री थी।   |   mahabharat अध्याय 9.54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  9.54.7 
बभूव श्रीमती राजन् शाण्डिल्यस्य महात्मन:।
सुता धृतव्रता साध्वी नियता ब्रह्मचारिणी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजन! वह तेजस्वी और तपस्वी भिक्षुणी, जो कठोर व्रत और ब्रह्मचर्य का पालन करती थी, महात्मा शाण्डिल्य की पुत्री थी।
 
King! That radiant and nun, who strictly observed fasts and celibacy, was the daughter of the great soul Shandilya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)