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mahabharat 9.54.32-33h: हे बलराम! जब चारों ओर से कटु वचनों से उन्हें पीड़ा हो रही थी, तब वे बलवान योद्धा हाथ में एक विशाल गदा लेकर सरोवर से उठ खड़े हुए।   |   mahabharat अध्याय 9.54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  9.54.32-33h 
स तुद्यमानो बलवान् वाग्भी राम समन्तत:॥ ३२॥
उत्थित: स ह्रदाद् वीर: प्रगृह्य महतीं गदाम्।
 
 
अनुवाद
हे बलराम! जब चारों ओर से कटु वचनों से उन्हें पीड़ा हो रही थी, तब वे बलवान योद्धा हाथ में एक विशाल गदा लेकर सरोवर से उठ खड़े हुए।
 
Balarama! When he was being tormented by bitter words from all sides, then that strong warrior stood up from the lake with a huge mace in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)