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mahabharat 9.54.31-32h: जब दुर्योधन जल को स्थिर करके उसके अन्दर सो रहा था, तब भगवान श्रीकृष्ण के साथ पाण्डव वहाँ पहुँचे और अपने कठोर वचनों से उसे कष्ट देने लगे॥31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  9.54.31-32h 
शयानं धार्तराष्ट्रं तु सलिले स्तम्भिते तदा॥ ३१॥
पाण्डवा: सह कृष्णेन वाग्भिरुग्राभिरार्दयन्।
 
 
अनुवाद
जब दुर्योधन जल को स्थिर करके उसके अन्दर सो रहा था, तब भगवान श्रीकृष्ण के साथ पाण्डव वहाँ पहुँचे और अपने कठोर वचनों से उसे कष्ट देने लगे॥31 1/2॥
 
When Duryodhana had immobilised the water and was sleeping inside it, the Pandavas, accompanied by Lord Krishna, arrived there and began to trouble him with their harsh words. ॥ 31 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)