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mahabharat 9.54.30-31h: परन्तु बलराम! शल्य के मारे जाने पर ये तीनों भी भय के मारे चारों ओर भाग गए। शल्य के मारे जाने पर दुर्योधन अत्यन्त दुःखी हुआ और कृपाचार्य आदि भागकर द्वैपायनश्वर में छिप गए।   |   mahabharat अध्याय 9.54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  9.54.30-31h 
तेऽपि वै विद्रुता राम दिशो दश भयात् तदा।
दुर्योधने हते शल्ये विद्रुतेषु कृपादिषु॥ ३०॥
ह्रदं द्वैपायनं नाम विवेश भृशदु:खित:।
 
 
अनुवाद
परन्तु बलराम! शल्य के मारे जाने पर ये तीनों भी भय के मारे चारों ओर भाग गए। शल्य के मारे जाने पर दुर्योधन अत्यन्त दुःखी हुआ और कृपाचार्य आदि भागकर द्वैपायनश्वर में छिप गए।
 
But Balarama! When Shalya was killed, these three also fled in all directions out of fear. Duryodhan was very sad after Shalya was killed and Kripa and others fled and ran away and hid in Dwaipayanaswar. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)