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mahabharat 9.54.20: वह नृत्य और गायन में कुशल है, देवताओं और ब्राह्मणों द्वारा सम्मानित है, उपद्रवी है और सदैव कलहप्रिय है। 20.   |   mahabharat अध्याय 9.54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  9.54.20 
नृत्ये गीते च कुशलो देवब्राह्मणपूजित:।
प्रकर्ता कलहानां च नित्यं च कलहप्रिय:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वह नृत्य और गायन में कुशल है, देवताओं और ब्राह्मणों द्वारा सम्मानित है, उपद्रवी है और सदैव कलहप्रिय है। 20.
 
He is skilled in dance and song, respected by the gods and brahmins, is a troublemaker and always loves strife. 20.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)