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mahabharat 9.54.17-18h: जब वे वहाँ ठहरे हुए थे, तभी देवर्षि नारद जी भी उस स्थान पर पहुँचे जहाँ भगवान बलराम बैठे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  9.54.17-18h 
तथा तु तिष्ठतां तेषां नारदो भगवानृषि:॥ १७॥
आजगामाथ तं देशं यत्र रामो व्यवस्थित:।
 
 
अनुवाद
जब वे वहाँ ठहरे हुए थे, तभी देवर्षि नारद जी भी उस स्थान पर पहुँचे जहाँ भगवान बलराम बैठे थे।
 
While they were thus staying there, the sage of the gods, Narada, also arrived at the spot where Lord Balarama was seated. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)