Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.54.10-11: बलरामजी उस पर्वत पर थोड़ी ही दूर गए थे, जिसकी ध्वजा पर तालका चिह्न सुशोभित है, तभी उनकी दृष्टि एक पुण्यमय एवं उत्तम तीर्थस्थान पर पड़ी। सरस्वती का उद्गम स्थान प्लक्षप्रस्रवण नामक तीर्थ था। उसे देखकर बलरामजी को बड़ा आश्चर्य हुआ॥10-11॥ | mahabharat अध्याय 9.54: प्लक्षप्रस्रवण आदि तीर्थों तथा सरस्वतीकी महिमा एवं नारदजीसे कौरवोंके विनाश और भीम तथा दुर्योधनके युद्धका समाचार सुनकर बलरामजीका उसे देखनेके लिये जाना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बलरामजी उस पर्वत पर थोड़ी ही दूर गए थे, जिसकी ध्वजा पर तालका चिह्न सुशोभित है, तभी उनकी दृष्टि एक पुण्यमय एवं उत्तम तीर्थस्थान पर पड़ी। सरस्वती का उद्गम स्थान प्लक्षप्रस्रवण नामक तीर्थ था। उसे देखकर बलरामजी को बड़ा आश्चर्य हुआ॥10-11॥
Balramji had gone a short distance to that mountain whose flag adorns the Talka symbol when his eyes fell on a virtuous and excellent place of pilgrimage. The place of origin of Saraswati was a pilgrimage place named Plakshaprasravana. Balramji was very surprised to see him. 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥