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श्लोक  9.53.8 
आगम्यागम्य चैवैनं भूयोभूयोऽवहस्य च।
शतक्रतुरनिर्विण्णं पृष्ट्वा पृष्ट्वा जगाम ह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शतक्रतु इन्द्र बार-बार कुरु के पास आते थे, जो कभी काम करना बंद नहीं करते थे, और उनसे प्रश्न करने के बाद उन पर हंसते थे और स्वर्ग चले जाते थे।
 
Shatakratu Indra used to come to Kuru again and again, who never stopped working, and after questioning him, used to laugh at him and go to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)