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mahabharat 9.53.7: तब इन्द्र ने उनका उपहास किया और स्वर्ग चले गए। राजा कुरु इस कार्य से अविचलित रहे और वहाँ भूमि जोतते रहे।   |   mahabharat अध्याय 9.53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  9.53.7 
अवहस्य तत: शक्रो जगाम त्रिदिवं पुन:।
राजर्षिरप्यनिर्विण्ण: कर्षत्येव वसुंधराम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र ने उनका उपहास किया और स्वर्ग चले गए। राजा कुरु इस कार्य से अविचलित रहे और वहाँ भूमि जोतते रहे।
 
Then Indra ridiculed them and went to heaven. King Kuru remained unperturbed by the task and continued tilling the land there. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)