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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  9.53.5 
इन्द्र उवाच
किमिदं वर्तते राजन् प्रयत्नेन परेण च।
राजर्षे किमभिप्रेतं येनेयं कृष्यते क्षिति:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने पूछा, "हे राजन! यह महान् प्रयास क्या हो रहा है? हे राजन! आप क्या चाहते हैं, जिसके कारण आप इस भूमि को जोत रहे हैं?"
 
Indra asked, "O King! What is happening with this great effort? O King! What do you want, because of which you are ploughing this land?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)