श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.53.3 
राम उवाच
किमर्थं कुरुणा कृष्टं क्षेत्रमेतन्महात्मना।
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं कथ्यमानं तपोधना:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
बलरामजी ने पूछा- तपोधानो! महात्मा कुरुण ने यह खेत क्यों जोता? मैं यह कथा आपके मुख से सुनना चाहता हूँ। 3॥
 
Balramji asked – Tapodhano! Why did Mahatma Kurune plow this field? I want to hear this story from your mouth. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)