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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन
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श्लोक 26
श्लोक
9.53.26
इत्युवाच स्वयं शक्र: सह ब्रह्मादिभिस्तदा।
तच्चानुमोदितं सर्वं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरै:॥ २६॥
अनुवाद
ऐसी बातें ब्रह्मा आदि देवताओं के साथ स्वयं इन्द्र ने भी कही थीं। ब्रह्मा, विष्णु और महादेवजी ने इन सब बातों का अनुमोदन किया था॥ 26॥
Such things were said by Indra himself along with other gods like Brahma etc. Brahma, Vishnu and Mahadevji had approved of all these things.॥ 26॥
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्याने कुरुक्षेत्रकथने त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्रा और सारस्वतोपाख्यानके प्रसंगमें कुरुक्षेत्रकी महिमाका वर्णनविषयक तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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