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mahabharat 9.53.25: यह अत्यंत शुभ, कल्याणकारी, देवताओं का प्रिय और सर्वगुण संपन्न स्थान है। अतः यहाँ युद्धभूमि में मारे गए सभी राजा सदैव पुण्य और अक्षय गति को प्राप्त होंगे।   |   mahabharat अध्याय 9.53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  9.53.25 
शिवं महापुण्यमिदं दिवौकसां
सुसम्मतं सर्वगुणै: समन्वितम्।
अतश्च सर्वे निहता नृपा रणे
यास्यन्ति पुण्यां गतिमक्षयां सदा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यह अत्यंत शुभ, कल्याणकारी, देवताओं का प्रिय और सर्वगुण संपन्न स्थान है। अतः यहाँ युद्धभूमि में मारे गए सभी राजा सदैव पुण्य और अक्षय गति को प्राप्त होंगे।
 
This is a very auspicious, beneficial, beloved place of gods and full of all virtues. Therefore, here all the kings killed in the battlefield will always attain virtuous and inexhaustible speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)