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mahabharat 9.53.2: पहले अमित तेजस्वी, बुद्धिमान राजर्षि प्रवर महात्मा कुरु ने बहुत वर्षों तक इस क्षेत्र को जोता था, इसलिए इसका नाम इस संसार में कुरुक्षेत्र प्रसिद्ध हुआ ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 9.53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  9.53.2 
पुरा च राजर्षिवरेण धीमता
बहूनि वर्षाण्यमितेन तेजसा।
प्रकृष्टमेतत् कुरुणा महात्मना
तत: कुरुक्षेत्रमितीह पप्रथे॥ २॥
 
 
अनुवाद
पहले अमित तेजस्वी, बुद्धिमान राजर्षि प्रवर महात्मा कुरु ने बहुत वर्षों तक इस क्षेत्र को जोता था, इसलिए इसका नाम इस संसार में कुरुक्षेत्र प्रसिद्ध हुआ ॥2॥
 
Earlier, Amit Tejasvi, intelligent Rajarshi Pravara Mahatma Kuru had plowed this area for many years, hence its name Kurukshetra became famous in this world. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)