आगम्य च तत: शक्रस्तदा राजर्षिमब्रवीत्।
अलं खेदेन भवत: क्रियतां वचनं मम॥ १२॥
मानवा ये निराहारा देहं त्यक्ष्यन्त्यतन्द्रिता:।
युधि वा निहता: सम्यगपि तिर्यग्गता नृप॥ १३॥
ते स्वर्गभाजो राजेन्द्र भविष्यन्ति महामते।
अनुवाद
तब इन्द्र वहाँ से आए और राजा कुरु से बोले - 'मनुष्यों के स्वामी! आप क्यों व्यर्थ कष्ट उठाते हैं? कृपया मेरी बात सुनिए। हे राजन! जो मनुष्य, पशु और पक्षी यहाँ बिना भोजन के मरेंगे अथवा युद्ध में मरेंगे, वे स्वर्ग के अधिकारी होंगे।'॥12-13 1/2॥
Then Indra came from there and said to King Kuru - 'Lord of men! Why do you take unnecessary trouble? Please listen to me. O great king! Those men, animals and birds who die here without food or die in war will be entitled to heaven.'॥ 12-13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥