श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 53: ऋषियोंद्वारा कुरुक्षेत्रकी सीमा और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.53.10 
एतच्छ्रुत्वाब्रुवन् देवा: सहस्राक्षमिदं वच:।
वरेण च्छन्द्यतां शक्र राजर्षिर्यदि शक्यते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर देवताओं ने सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र से कहा - 'शक्र! यदि सम्भव हो तो राजा कुरु को वर देकर उनके अनुकूल बना लेना चाहिए।॥10॥
 
On hearing this the gods said to the thousand eyed Indra, 'Sakra! If possible then the King Kuru should be made favourable by granting him a boon.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)