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mahabharat 9.52.8-9h: फिर वह कठोर तपस्या से अपने शरीर को कष्ट देकर निर्जन वन में चली गई और पितरों तथा देवताओं की पूजा करने के लिए अपने को तैयार कर लिया।   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  9.52.8-9h 
तत: सा तपसोग्रेण पीडयित्वाऽऽत्मनस्तनुम्॥ ८॥
पितृदेवार्चनरता बभूव विजने वने।
 
 
अनुवाद
फिर वह कठोर तपस्या से अपने शरीर को कष्ट देकर निर्जन वन में चली गई और पितरों तथा देवताओं की पूजा करने के लिए अपने को तैयार कर लिया।
 
Then, by tormenting her body with severe austerities, she went to the deserted forest and prepared herself to worship the ancestors and gods. 8 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)