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mahabharat 9.52.7-8h: राजा! उसने बहुत समय तक कठोर तपस्या की। उसके पिता ने अपने जीवनकाल में उसका विवाह किसी से कराने का प्रयत्न किया; परन्तु वह सुन्दरी विवाह करना नहीं चाहती थी। उसे अपने लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा था।   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  9.52.7-8h 
तस्यास्तु तपसोग्रेण महान् कालोऽत्यगान्नृप।
सा पित्रा दीयमानापि तत्र नैच्छदनिन्दिता॥ ७॥
आत्मन: सदृशं सा तु भर्तारं नान्वपश्यत।
 
 
अनुवाद
राजा! उसने बहुत समय तक कठोर तपस्या की। उसके पिता ने अपने जीवनकाल में उसका विवाह किसी से कराने का प्रयत्न किया; परन्तु वह सुन्दरी विवाह करना नहीं चाहती थी। उसे अपने लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा था।
 
King! She spent a lot of time performing severe penance. Her father tried to get her married to someone during his lifetime; but that beautiful lady did not wish to get married. She could not find any suitable groom for herself. 7 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)